My school crush
हर बार की तरह में स्कूल में पढ़ती थी मेरी आठवीं कक्षा समाप्त हुई थी और मुझे अब स्कूल बदलनी थी क्योंकि हमारी स्कूल में आठवीं क्लास तक ही थी.
हमारी स्कूल में से मेरा परिणाम आया.मेरा परिणाम 90 जितना आया था। तब मेरे पुरानी स्कूल के टीचर ने मुझे एक स्कूल सुझाया। मैंने मेरी दोस्त से पूछा लेकिन कोई मेरे साथ उस स्कूल में कोई दोस्त नहीं आई।
मैंने अकेले ही उस स्कूल में एडमिशन लिया। तब में पहले दिन उस स्कूल में गई। तब उस स्कूल में मेरा कोई दोस्त नहीं था। मेरे पहले दिन सब साथ में बैठे थे। सब अपने दोस्तो के साथ बैठे थे लेकिन मैं अकेले ही बैठी थी । कुछ दिन तो में अकेले ही बैठी थी लेकिन मेरे में एक बात ये थी कि में दोस्त बहुत जल्दी बना लेती थी ।
मेरा स्वभाव बहुत सरल था । में बहुत सजती नहीं थी।में बहुत कोमल , दयालु थी । तब हमारी स्कूल में गणित के टीचर नहीं थे । तब हमारे गणित के क्लास ऐसे ही जाते थे ।हमारे सारे टीचर जितना उन्हें आता था वो हमें पढ़ाते थे ।
तब हमारी स्कूल में एक पुरुष टीचर आए । उनका नाम जयदीप था। वो हमारा गणित विषय के शिक्षक थे। मेरे स्कूल में गए हुए दो महीने ही हुए थे। हमारी स्कूल में नवमी में कुल छ क्लास थे। पहले तीन क्लास में लड़के थे और बाकी के तीन क्लास में लड़किया थी । A B C D E F ऐसे छ क्लास थे उसमें से हम f में थे ।
