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कहानी: सुनहरी पतंग और सपनों का आसमान

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Chapter 1 - कहाni: सुनहरी पतंग और सपनों का आसमान

नंदनवन गाँव के किनारे, मिट्टी के एक छोटे से घर में आर्यन अपनी बूढ़ी दादी के साथ रहता था। आर्यन के पिता, जो एक मामूली पतंग बनाने वाले थे, बरसों पहले एक बड़े हादसे में चल बसे थे। दादी और आर्यन की गुज़र-बसर पतंगें बेचकर ही होती थी। आर्यन की आँखों में शहर जाकर एक बड़ा इंजीनियर बनने का सपना था, लेकिन गरीबी ने उसके पंख बाँध रखे थे।

हर साल गाँव में 'स्वतंत्रता दिवस' पर एक बड़ी पतंगबाज़ी प्रतियोगिता होती थी। जीतने वाले को शहर के तकनीकी कॉलेज में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिलती थी। आर्यन बरसों से इस प्रतियोगिता को जीतने का सपना देख रहा था। उसने इस बार एक विशेष 'सुनहरी पतंग' बनाई थी। यह सिर्फ कागज़ और लकड़ी नहीं, बल्कि उसके सपनों की उड़ान थी। उसने अपनी पतंग पर 'आशा' नाम लिखा था।

प्रतियोगिता का दिन आया। गाँव के धनी ज़मींदार का बेटा, विक्रम, अपनी महँगी और बड़ी पतंग के साथ पहुँचा। सबकी निगाहें विक्रम की बड़ी पतंग पर थीं, जबकि आर्यन के पास साधारण कागज़ की सुनहरी पतंग थी। खेल शुरू हुआ। सबने अपनी पतंगें हवा में छोड़ीं। आर्यन की 'आशा' धीरे-धीरे ऊपर उठने लगी। उसकी पतंग सबसे ऊँची और संतुलित उड़ रही थी, जैसे उसमें जान हो।

तभी, विक्रम ने चाल चली। उसने अपनी पतंग के धागे में काँच (मांझा) लपेट रखा था, जो कि नियमों के विरुद्ध था। उसने आर्यन की पतंग काटने की कोशिश की। आर्यन डरा नहीं। उसने पतंग के विज्ञान को समझा था। उसने विक्रम की चाल को भाँपते हुए अपनी पतंग को बड़ी चतुराई से घुमाया और विक्रम के धागे को खुद ही उलझा दिया। विक्रम की पतंग कटकर दूर जा गिरी।

लेकिन तभी, आसमान में काले बादल छा गए और तेज़ हवा चलने लगी। सभी प्रतियोगी अपनी पतंगें बचाने लगे। आर्यन की पतंग भी हिलोरें ले रही थी। गाँव वाले चिल्लाए, "आर्यन, पतंग काट दे, वरना धागा टूट जाएगा!" लेकिन आर्यन को पता था कि अगर उसने धागा ढीला छोड़ा, तो पतंग बची रहेगी। उसने अपने धागे को अपनी 'सुनहरी पतंग' की तरह ही ढीला और मज़बूत रखा।

तेज़ हवा में भी उसकी पतंग शांत रही, क्योंकि उसने उसमें सही जगह पर पतंग की पूंछ (balance) लगाई थी। जब तक हवा रुकी, आर्यन की पतंग सबसे ऊँची और अडिग थी। वह प्रतियोगिता जीत गया।

जब आर्यन को पुरस्कार मिला, तो उसने अपनी 'सुनहरी पतंग' आसमान की ओर देखते हुए कहा, "दादी, मेहनत और सही योजना का धागा अगर मज़बूत हो, तो सपनों का आसमान कभी दूर नहीं होता।" वह अपनी ईमानदारी औरज्ञान के दम पर शहर