सपना बचपन से ही जिज्ञासु थी। वह जब गाँव के सरकारी स्कूल जाती,l तो रास्ते में मिलने वालlे पेड़-पौधों, पक्षियों और गाँव के हर छोटे-बड़े दृश्य को ध्यान से देखती। स्कूल में भी वह lसबसे होनहार छात्रा थी। उसे विज्ञान और गणित में बहुत रुचि थी। वह अक्सर रात को दीये की रोशनी lमें तारों को देखती और सोचती कि क्या कभीl वह भी उन तारों की तरह आसमान में ऊँचा उड़ पाएगी,l
गाँव के स्कूल में कक्षा 8 तक ही पढ़ाई थी। उसके बाद लड़कियों को पढ़ाना मतलबl गाँव वालों केl lहिसाब से "बेवजह की ज़िद" थी। सपना जब l8वीं पास हुई, तो कमला ने फिर से उसे घर में lबिठाने की बात कही। रामदीन ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जमीन का एक छोटा हिस्सा lबेचकर शहर के स्कूल में सपना का दाखिला lllकराया। यह निर्णय गाँव के लिए एक बड़ी बात थlी, और सपना के लिए एक नई शुरुआत।
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